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RATANPUR प्राकृतिक खेती किसानों के अतिरिक्त लाभार्जन का उचित माध्यम- स्मिता सिंह

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RATANPUR  जनपद मऊ के रतनपुरा प्रखंड के दक्षिणांचल स्थित बीबीपुर ग्राम पंचायत की निवासिनी एवं आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या की शोध छात्र स्मिता सिंह ने किसानों के अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने के संदर्भ में अनेक उपयोगी जानकारी दी है।
स्मिता सिंह ने बताया कि गर्मी में अतिरिक्त आमदनी कतिपय अवसर है।
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जिसमें ज़ायद फसलें और शून्य लागत से प्राकृतिक खेती करके लाभार्जन किया जा सकता है।
स्मिता सिंह ने बताया कि भारत में अधिकतर किसान खरीफ और रबी फसलों पर निर्भर होते हैं,

लेकिन इनके बीच की अवधि में ज़ायद फसलें एक शानदार अवसर प्रदान करती हैं।

गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली ज़ायद फसलें जैसे तरबूज, खरबूज, ककड़ी, मूंग, और कद्दू किसानों को न केवल अतिरिक्त आमदनी देती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनाए रखती हैं। यह फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं और बाजार में इनकी अच्छी मांग रहती है, जिससे किसानों को त्वरित लाभ मिलता है।

इसके अलावा, ज़ायद फसलें जलवायु
परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी मददगार साबित हो रही हैं क्योंकि इनकी खेती से भूमिगत जलस्तर पर अधिक दबाव नहीं पड़ता ।
स्मिता सिंह ने आगे बताया कि किसानों के लिए खेती का एक क्रांतिकारी तरीका बनता जा रहा है।

इस पद्धति में किसी भी तरह के रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और उत्पादन लागत घटती है।
उन्होंने बताया कि जेडबीएफ के तहत देशी गाय के गोबर और गौमूत्र से बने जीवामृत और घनजीवामृत जैसे जैविक पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाने के साथ-साथ फसलों को भी पोषण प्रदान करते हैं। इससे किसानों की निर्भरता बाहरी संसाधनों पर कम होती है और खेती अधिक लाभदायक बनती है।

सरकार भी प्राकृतिक खेती और ज़ायद फसलों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चला रही है, जैसे कि
परंपरागत कृषि विकास योजना और मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट
इन योजनाओं के तहत किसानों को जैविक खेती के लिए आर्थिक सहायता दी जाती
है, जिससे वे बिना किसी अतिरिक्त लागत के प्राकृतिक खेती अपना सकते हैं।

इसके अलावा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) भी किसानों को प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों की जानकारी देकर उनकी उपज और आमदनी बढ़ाने में सहयोग कर रहा है।
कई किसानों ने ज़ायद फसलें अपनाकर और शून्य लागत प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी आमदनी दोगुनी बढ़ोतरी की है।

उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के रामलाल ने ज़ायद मौसम में मूंग और तरबूज उगाकर पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक मुनाफा कमाया। वहीं, मध्य प्रदेश के मोहन यादव ने (जेडबीएनएफ)
अपनाकर अपनी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई और फसल उत्पादन में सुधार किया ।
आज के समय में जब जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और घटती उत्पादकता किसानों के लिए बड़ी चुनौतियाँ बन चुकी हैं, ज़ायद फसलों और शून्य लागत प्राकृतिक खेती को अपनाना एक बुद्धिमानी भरा फैसला हो सकता है।

यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि उनकी भूमि को भी स्वस्थ और टिकाऊ बनाए रखेगा।

गर्मी के मौसम में खेती को लेकर सही रणनीति अपनाकर किसान आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।अब समय है ज़ायद फसलों और प्राकृतिक खेती से समृद्धि की ओर बढ़ने का ।

राजेश वर्मा
स्टेट कोऑर्डिनेटर उत्तर प्रदेश
चाणक्य न्यूज इंडिया

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